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हनुमान अंश का वायरल गाना: भक्ति, भावना और मिट्टी की खुशबू से बना ऐसा संगीत जिसने सोशल मीडिया पर मचाई धूम

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ब्युरो रिपोर्ट Prime28News

आज के दौर में किसी गाने का वायरल होना कोई नई बात नहीं है। हर दिन सैकड़ों गाने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिलीज होते हैं और उनमें से कुछ ही लोगों की जुबान तक पहुंच पाते हैं। लेकिन जब किसी गीत में सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि भावनाएं, भक्ति और मिट्टी की सोंधी खुशबू शामिल हो, तो उसका असर कुछ अलग ही होता है। फिल्म “हनुमान अंश” के गानों के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

फिल्म के संगीत ने रिलीज के बाद दर्शकों का ध्यान खींचा है। खासकर “मैंने तेरे ही भरोसे” यानी हनुमान जी के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना वाला गीत लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ। इस गीत की सबसे खास बात इसकी आवाज है। बुंदेलखंड से आने वाले दृष्टिबाधित लोकगायक सुनील लोधी की आवाज में वह सादगी और दर्द सुनाई देता है, जो किसी बड़े स्टूडियो की चमक-दमक से अलग है।

सुनील लोधी वर्षों से गांवों और स्थानीय इलाकों में भजन तथा बुंदेली लोकगीत गाते रहे हैं। उनकी एक पारंपरिक हनुमान भजन रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हुई और इसी वायरल पहचान ने उनके लिए मुंबई और बॉलीवुड तक पहुंचने का रास्ता खोला।

आखिर क्यों वायरल हुआ “हनुमान अंश” का गाना?

किसी गाने के वायरल होने के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं होता। उसकी धुन, आवाज, बोल, वीडियो, भावनाएं और सबसे महत्वपूर्ण बात—लोगों से उसका जुड़ाव—मिलकर उसे लोकप्रिय बनाते हैं।

“हनुमान अंश” के वायरल गीत में भी यही देखने को मिलता है।

गाने की शुरुआत से ही एक भक्त और अपने आराध्य के बीच संबंध महसूस होता है। यहां प्रेम किसी सांसारिक रिश्ते का नहीं, बल्कि विश्वास और समर्पण का है। भक्त कहता है कि उसकी जिंदगी की नाव अब उसके प्रभु के भरोसे है।

यही भावना आज के दर्शकों को छू रही है।

आज की तेज जिंदगी में इंसान आर्थिक दबाव, करियर की चिंता, रिश्तों की उलझनों और भविष्य की अनिश्चितता से गुजर रहा है। ऐसे समय में जब कोई गीत यह भाव व्यक्त करता है कि “मैं सब कुछ तुम्हारे भरोसे छोड़ चुका हूं”, तो सुनने वाले को उसमें अपनी कहानी दिखाई देने लगती है।

यही इस गीत की सबसे बड़ी ताकत है।

सुनील लोधी की आवाज बनी गाने की पहचान

“हनुमान अंश” के वायरल संगीत की चर्चा सुनील लोधी के बिना अधूरी है।

मध्य प्रदेश के सागर क्षेत्र और बुंदेलखंड की लोक-संस्कृति से जुड़े सुनील लोधी ने छोटी उम्र से ही भजन और लोकगीत गाने शुरू कर दिए थे। वह गांवों और स्थानीय ट्रेनों में भी अपनी कला का प्रदर्शन करते रहे हैं। लंबे समय तक उनकी दुनिया बहुत सीमित थी, लेकिन उनकी आवाज में ऐसी मौलिकता थी जो डिजिटल दौर में भी लोगों को रोक सकती थी।

उनकी एक हनुमान भजन रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हुई। रिपोर्टों के अनुसार, इस रिकॉर्डिंग को करोड़ों बार देखा गया और इसके बाद संगीत निर्माता पंकज वीआरके की नजर उनकी आवाज पर पड़ी। उन्हें मुंबई बुलाया गया और आगे चलकर उनकी आवाज “हनुमान अंश” के संगीत का हिस्सा बनी।

यह कहानी सिर्फ एक गायक के बॉलीवुड तक पहुंचने की कहानी नहीं है। यह इस बात का उदाहरण भी है कि आज इंटरनेट किसी छोटे शहर या गांव की प्रतिभा को दुनिया तक पहुंचाने की ताकत रखता है।

“तेरे ही भरोसे हनुमान” में क्या खास है?

इस गीत की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी है।

आज के बहुत से फिल्मी गानों में भारी अरेंजमेंट, इलेक्ट्रॉनिक बीट्स और बड़े पैमाने की प्रोडक्शन वैल्यू सुनाई देती है। लेकिन भक्ति गीतों में कई बार अत्यधिक सजावट भावना को पीछे छोड़ देती है।

“तेरे ही भरोसे हनुमान” की लोकप्रियता इसके विपरीत दिशा में जाती दिखाई देती है।

यहां आवाज को आगे रखा गया है।

गायक की आवाज में एक लोकगायक की सहजता है। ऐसा लगता है जैसे कोई कलाकार किसी बड़े मंच के लिए नहीं, बल्कि अपने आराध्य के सामने बैठकर गा रहा हो। यही अनुभव सुनने वाले के मन में एक अलग तरह की आत्मीयता पैदा करता है।

गीत सुनते समय ऐसा नहीं लगता कि यह सिर्फ एक फिल्म का हिस्सा है। बल्कि ऐसा महसूस होता है जैसे किसी मंदिर, गांव की चौपाल या किसी धार्मिक आयोजन में कोई भक्त अपने मन की बात कह रहा हो।

यही प्राकृतिक एहसास गीत को बाकी संगीत से अलग करता है।

बुंदेली लोकसंगीत की ताकत

सुनील लोधी की आवाज के साथ बुंदेलखंड की लोक-संस्कृति भी इस गाने की पहचान बन जाती है।

भारत में हर क्षेत्र की अपनी संगीत परंपरा है। बुंदेलखंड की लोकगायकी में मिट्टी से जुड़ी हुई एक खास ऊर्जा दिखाई देती है। वहां के लोकगीतों में जीवन के संघर्ष, आस्था, प्रेम, प्रकृति और धार्मिक विश्वास सहज रूप से दिखाई देते हैं।

जब ऐसी आवाज किसी आधुनिक फिल्म के संगीत से जुड़ती है, तो वह गीत को एक अलग पहचान देती है।

यही कारण है कि “हनुमान अंश” का संगीत सिर्फ पारंपरिक भजन सुनने वाले लोगों तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया के जरिए यह युवा दर्शकों तक भी पहुंचा।

युवा वर्ग के बीच रील्स और शॉर्ट वीडियो के माध्यम से इस तरह के गीत तेजी से लोकप्रिय हो सकते हैं, क्योंकि गीत का भाव किसी विशेष उम्र तक सीमित नहीं है।

सोशल मीडिया ने बदली कहानी

अगर “हनुमान अंश” के संगीत की बात हो और सोशल मीडिया को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो कहानी अधूरी रह जाएगी।

सुनील लोधी की मूल पहचान ही सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक रिकॉर्डिंग से बढ़ी। यही रिकॉर्डिंग उनके लिए बॉलीवुड तक पहुंचने का माध्यम बनी।

पहले किसी गांव के कलाकार को पहचान बनाने के लिए रेडियो, टेलीविजन या किसी बड़े संगीत निर्माता का इंतजार करना पड़ता था। आज एक मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया गया गीत भी लाखों लोगों तक पहुंच सकता है।

यह बदलाव भारतीय संगीत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

कई ऐसे कलाकार हैं जिनके पास बड़े स्टूडियो नहीं हैं, महंगे वाद्ययंत्र नहीं हैं और न ही किसी बड़े संगीत परिवार का समर्थन है। लेकिन उनके पास आवाज है, हुनर है और अपनी मिट्टी से जुड़ी हुई कहानी है।

सुनील लोधी का सफर इसी बदलाव का उदाहरण बनकर सामने आया है।

“पार्वती” ने भी खींचा लोगों का ध्यान

“हनुमान अंश” के संगीत में सिर्फ एक ही गीत चर्चा में नहीं है। फिल्म का “पार्वती” गीत भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है। रिपोर्टों में इसे फिल्म के चर्चित ट्रैक्स में शामिल किया गया है।

फिल्म के संगीत की खासियत यह है कि इसमें आध्यात्मिकता और लोक-संगीत का प्रभाव अलग-अलग रूपों में दिखाई देता है।

“पार्वती” जैसे गीत जहां धार्मिक और सांस्कृतिक भावभूमि को मजबूत करते हैं, वहीं “तेरे ही भरोसे हनुमान” भक्त और भगवान के बीच विश्वास को सामने रखता है।

इस तरह फिल्म का संगीत सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने का साधन नहीं रह जाता, बल्कि खुद फिल्म की पहचान का हिस्सा बन जाता है।

भक्ति संगीत का नया दौर

भारत में भक्ति संगीत सदियों पुराना है। कबीर, तुलसीदास, सूरदास से लेकर आधुनिक भजन गायकों तक, लोगों ने संगीत के माध्यम से ईश्वर के साथ अपना संबंध व्यक्त किया है।

लेकिन डिजिटल युग में भक्ति संगीत का रूप बदल रहा है।

अब भजन सिर्फ मंदिर या धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं हैं। वे YouTube, Instagram Reels, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सुने जाते हैं।

सुबह पूजा के समय कोई व्यक्ति भजन सुनता है।

कोई व्यक्ति यात्रा के दौरान इसे सुनता है।

कोई तनाव के समय धार्मिक संगीत लगाता है।

और कोई उसी गीत पर वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर साझा कर देता है।

इस तरह एक भक्ति गीत कुछ ही दिनों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है।

“हनुमान अंश” का संगीत इसी बदलती हुई डिजिटल संस्कृति के बीच लोकप्रिय हुआ है।

क्यों लोगों को हनुमान भक्ति के गीत पसंद आते हैं?

हनुमान जी भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना में साहस, शक्ति, सेवा और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं।

हनुमान भक्ति से जुड़े गीतों में अक्सर दो भाव एक साथ दिखाई देते हैं—शक्ति और समर्पण।

भक्त मानता है कि वह अपने जीवन की कठिनाइयों से लड़ सकता है, लेकिन साथ ही वह अपने आराध्य पर भरोसा भी रखता है।

यही विरोधाभास इन गीतों को भावनात्मक बनाता है।

एक तरफ व्यक्ति कहता है कि वह संघर्ष करेगा।

दूसरी तरफ वह कहता है कि अंतिम भरोसा भगवान पर है।

“तेरे ही भरोसे हनुमान” जैसे गीत इसी मनोभाव को आवाज देते हैं।

वायरल होने की असली वजह सिर्फ भक्ति नहीं

यह कहना आसान होगा कि गीत केवल धार्मिक होने के कारण वायरल हुआ। लेकिन पूरी कहानी इससे कहीं बड़ी है।

अगर गीत में अच्छी आवाज न होती, अगर उसकी प्रस्तुति प्रभावी न होती और अगर उसमें भावनात्मक जुड़ाव न होता, तो सिर्फ धार्मिक विषय उसे इतनी दूर तक नहीं ले जा सकता था।

सुनील लोधी की आवाज इस गीत को अलग पहचान देती है।

उनकी आवाज में बनावटीपन कम और अनुभव ज्यादा सुनाई देता है।

जब कोई कलाकार वर्षों तक गांवों, मेलों और स्थानीय कार्यक्रमों में गाता है, तो उसकी गायकी में एक अलग प्रकार की प्राकृतिक पकड़ विकसित हो जाती है।

स्टूडियो में तकनीक आवाज को बेहतर बना सकती है, लेकिन अनुभव से पैदा होने वाली आत्मीयता को पूरी तरह बनाया नहीं जा सकता।

यही चीज सुनील की आवाज में सुनाई देती है।

एक छोटे कलाकार से बॉलीवुड तक का सफर

सुनील लोधी की कहानी आज के युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा बन सकती है।

एक ऐसा कलाकार जिसने स्थानीय स्तर पर भजन गाए, जिसकी पहचान मुख्यधारा में नहीं थी, जिसकी दृष्टि नहीं थी, लेकिन जिसकी आवाज ने लोगों को रोक दिया।

उनका वायरल वीडियो संगीत की दुनिया में एक दरवाजा बन गया।

इसके बाद उन्हें मुंबई पहुंचने का मौका मिला और फिल्म के लिए रिकॉर्डिंग करने का अवसर मिला।

यहां एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि वायरल होना हमेशा सफलता की गारंटी नहीं होता। हजारों वीडियो वायरल होते हैं और कुछ दिनों बाद लोग उन्हें भूल जाते हैं।

लेकिन सुनील लोधी के मामले में वायरलिटी के साथ वास्तविक प्रतिभा भी मौजूद थी।

इसलिए सोशल मीडिया की लोकप्रियता आगे चलकर एक वास्तविक करियर अवसर में बदल गई।

“हनुमान अंश” फिल्म और संगीत का संबंध

“हनुमान अंश” नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित फिल्म है। फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी हैं और इसमें आध्यात्मिकता, भक्ति तथा सेवा जैसे विषयों को केंद्र में रखा गया है।

ऐसी कहानी के लिए संगीत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है।

अगर कहानी आध्यात्मिक है, तो संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं कर सकता। उसे वातावरण बनाना पड़ता है।

उसे दर्शक को कहानी की भावना में ले जाना पड़ता है।

यही वजह है कि फिल्म में लोक और भक्ति संगीत का इस्तेमाल कहानी की भावनात्मक दुनिया को मजबूत करता है।

“तेरे ही भरोसे हनुमान” जैसे गीत दर्शक को पात्रों और कहानी से भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम करते हैं।

कम बजट की फिल्म और बड़ा प्रभाव

“हनुमान अंश” की चर्चा सिर्फ संगीत की वजह से नहीं हो रही है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है।

रिपोर्टों के मुताबिक, फिल्म लगभग ₹2 करोड़ के बजट में बनी और शुरुआती दिनों में धीमी शुरुआत के बावजूद सकारात्मक वर्ड ऑफ माउथ के कारण इसकी कमाई तेजी से बढ़ी।

यह सफलता बताती है कि दर्शक हमेशा केवल बड़े सितारों और बड़े बजट की फिल्मों का इंतजार नहीं करते।

कभी-कभी कहानी, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव भी दर्शकों को थिएटर तक खींच सकता है।

और जब फिल्म का संगीत लोगों के दिल में जगह बना ले, तो उसका असर और मजबूत हो जाता है।

वायरल गाने ने फिल्म को भी फायदा पहुंचाया

फिल्म के गाने जब सोशल मीडिया पर चर्चा में आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से फिल्म का नाम भी लोगों तक पहुंचता है।

कोई व्यक्ति पहले गीत सुनता है।

फिर वह गायक के बारे में जानना चाहता है।

फिर फिल्म का नाम खोजता है।

इसके बाद फिल्म के ट्रेलर और दूसरे वीडियो देखता है।

यानी गीत फिल्म के लिए एक तरह का प्रवेश द्वार बन जाता है।

“हनुमान अंश” के मामले में सुनील लोधी की कहानी ने इस प्रभाव को और मजबूत किया। एक वायरल लोकगायक का बॉलीवुड तक पहुंचना अपने आप में ऐसी कहानी है जिसे लोग दूसरों के साथ साझा करना चाहते हैं।

लोगों को इस गाने में अपनी कहानी क्यों दिखती है?

हर व्यक्ति की जिंदगी में ऐसा समय आता है जब उसे लगता है कि परिस्थितियां उसके नियंत्रण से बाहर हैं।

कोई बीमारी से परेशान है।

कोई नौकरी की चिंता में है।

कोई परिवार की समस्या से गुजर रहा है।

कोई आर्थिक परेशानी में है।

ऐसे समय में विश्वास इंसान को मानसिक ताकत दे सकता है।

भक्ति गीत इसी विश्वास को शब्द देते हैं।

“मैं तेरे भरोसे हूं”—यह सिर्फ एक धार्मिक वाक्य नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति है।

यह स्वीकार करना कि हर चीज हमारे नियंत्रण में नहीं है और फिर भी आगे बढ़ते रहना—यही इस तरह के गीतों का भावनात्मक प्रभाव है।

आवाज में दर्द और विश्वास

सुनील लोधी की गायकी में एक खास बात है—उनकी आवाज सुनते समय ऐसा लगता है जैसे गीत केवल गाया नहीं जा रहा, बल्कि जिया जा रहा है।

लोकगायकी में यह गुण बहुत महत्वपूर्ण होता है।

एक प्रशिक्षित गायक सुर को बहुत खूबसूरती से पकड़ सकता है, लेकिन श्रोता को भाव महसूस कराने के लिए आवाज में अनुभव भी होना चाहिए।

सुनील की कहानी और उनकी आवाज एक-दूसरे से जुड़ी हुई लगती हैं।

उन्होंने वर्षों तक संघर्ष के बीच संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। इसलिए जब वे हनुमान भक्ति का गीत गाते हैं, तो उसमें सिर्फ शब्द नहीं बल्कि उनकी अपनी यात्रा की छाप भी महसूस होती है।

शायद यही कारण है कि उनकी आवाज श्रोताओं के मन में जल्दी उतर जाती है।

आज के संगीत उद्योग के लिए संदेश

“हनुमान अंश” के वायरल गाने की कहानी संगीत उद्योग को भी एक संदेश देती है।

प्रतिभा केवल महानगरों में नहीं मिलती।

देश के छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में ऐसे हजारों कलाकार हैं जिनकी आवाज अभी दुनिया तक नहीं पहुंची है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म इन कलाकारों के लिए बड़ा अवसर बन सकते हैं।

एक मोबाइल रिकॉर्डिंग से शुरुआत हो सकती है।

एक वीडियो वायरल हो सकता है।

कोई निर्माता उस आवाज को सुन सकता है।

और फिर वही कलाकार बड़े मंच तक पहुंच सकता है।

सुनील लोधी का सफर इसी संभावना की ओर इशारा करता है।

भक्ति और आधुनिकता का संगम

“हनुमान अंश” के संगीत की सफलता का एक और कारण यह है कि इसमें पुरानी भक्ति परंपरा और आधुनिक डिजिटल संस्कृति एक साथ दिखाई देती हैं।

गीत की भावना पारंपरिक है।

भाषा और लोक-संगीत की जड़ें जमीन से जुड़ी हैं।

लेकिन उसे सुनने वाला आज का युवा है।

वह इसे मोबाइल पर सुनता है।

रील में इस्तेमाल करता है।

स्टेटस पर लगाता है।

दोस्तों को शेयर करता है।

इस तरह सदियों पुरानी भक्ति एक नए माध्यम में नई पीढ़ी तक पहुंचती है।

यह भारतीय संगीत की खास खूबी है कि वह समय के साथ अपना माध्यम बदलता है, लेकिन अपनी मूल भावना को बनाए रख सकता है।

क्या यह सिर्फ एक वायरल ट्रेंड है?

शायद नहीं।

वायरलिटी निश्चित रूप से किसी गीत को तेजी से लोकप्रिय बना सकती है, लेकिन लंबे समय तक याद रहने के लिए गीत में कुछ और होना जरूरी है।

“तेरे ही भरोसे हनुमान” जैसे गीत की असली परीक्षा समय के साथ होगी।

अगर लोग इसे कुछ महीनों बाद भी पूजा, यात्रा, व्यक्तिगत समय या धार्मिक अवसरों पर सुनते हैं, तो यह केवल वायरल गीत नहीं बल्कि लोकप्रिय भक्ति गीत बन जाएगा।

और इसकी संभावना इसलिए मजबूत दिखाई देती है क्योंकि गीत की लोकप्रियता सिर्फ फिल्म के प्रचार तक सीमित नहीं रही। गायक की अपनी कहानी भी लोगों को आकर्षित कर रही है।

सुनील लोधी की सफलता की सबसे बड़ी खूबी

इस कहानी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यहां सफलता की शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं हुई।

न कोई बड़ा लॉन्च।

न कोई महंगा म्यूजिक वीडियो।

न किसी बड़े स्टार का सहारा।

बस एक आवाज थी।

और वह आवाज लोगों तक पहुंची।

यही इंटरनेट की सबसे बड़ी शक्ति है।

आज कोई भी प्रतिभाशाली कलाकार अपनी कला को दुनिया के सामने रख सकता है। हां, सफलता की गारंटी नहीं है, लेकिन अवसर पहले की तुलना में बहुत अधिक हैं।

सुनील लोधी ने जिस तरह स्थानीय भजन गायकी से बॉलीवुड तक का सफर तय किया, वह कई उभरते कलाकारों के लिए उम्मीद की कहानी है।

“हनुमान अंश” का संगीत क्यों याद रखा जा सकता है?

किसी फिल्म के गीत तभी याद रहते हैं जब वे फिल्म से बाहर निकलकर लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाएं।

“हनुमान अंश” के संगीत के साथ अभी यही प्रक्रिया दिखाई दे रही है।

लोग गीत सुन रहे हैं।

गायक की कहानी खोज रहे हैं।

रील्स बना रहे हैं।

गीत को दूसरे लोगों के साथ साझा कर रहे हैं।

और सबसे महत्वपूर्ण—गीत की भावना से जुड़ रहे हैं।

यही किसी संगीत की वास्तविक सफलता है।

निष्कर्ष

“हनुमान अंश” का वायरल गीत केवल एक भक्ति गीत की सफलता की कहानी नहीं है। यह भक्ति, लोक-संगीत, सोशल मीडिया और संघर्ष से निकली प्रतिभा के मिलन की कहानी है।

सुनील लोधी की आवाज ने यह साबित किया है कि संगीत की असली ताकत हमेशा बड़े नाम, बड़े बजट या बड़ी मशीनरी में नहीं होती। कभी-कभी एक साधारण आवाज, सच्ची भावना और वर्षों की साधना मिलकर ऐसा असर पैदा कर देती है कि पूरा देश उस आवाज को सुनने लगता है।

“तेरे ही भरोसे हनुमान” की लोकप्रियता इस बात का उदाहरण है कि जब किसी गीत में लोगों की भावनाओं को छूने की क्षमता होती है, तो वह स्क्रीन से निकलकर सीधे दिल तक पहुंच सकता है।

बुंदेलखंड की मिट्टी से उठी एक आवाज का बॉलीवुड तक पहुंचना अपने आप में प्रेरणादायक है। सुनील लोधी की कहानी उन तमाम कलाकारों के लिए उम्मीद है जो बिना किसी बड़े मंच के अपनी कला को जिंदा रखे हुए हैं।

और शायद यही “हनुमान अंश” के वायरल संगीत का सबसे बड़ा संदेश है—

सच्ची आवाज को रास्ता मिलने में देर हो सकती है, लेकिन अगर उसमें भाव और सच्चाई हो, तो उसकी गूंज बहुत दूर तक जाती है।

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